कानपुर में ₹5,600 करोड़ के संदिग्ध साइबर लेन-देन का खुलासा, 2 आरोपी गिरफ्तार
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर पुलिस ने एक कथित अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क की जांच में बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों और संस्थाओं में करीब ₹5,600 करोड़ के वित्तीय लेन-देन का पता चला है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस आंकड़े का सत्यापन अभी जारी है और पूरे ₹5,600 करोड़ को सीधे ठगी की रकम मानना अभी उचित नहीं है। �
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जांच के दौरान करीब 72 संदिग्ध बैंक खातों और देशभर से जुड़ी 86 साइबर अपराध शिकायतों की जानकारी सामने आई है। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से करीब ₹65.26 लाख नकद और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। �
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पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के माध्यम से कितना पैसा वास्तव में साइबर अपराध से आया, कितना पैसा अन्य प्रकार के लेन-देन का था और पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आया नेटवर्क कथित तौर पर निवेश में अधिक मुनाफे का लालच देने, ऑनलाइन गेमिंग और क्रिकेट सट्टेबाजी जैसे माध्यमों से लोगों से रकम लेने तथा अलग-अलग बैंक खातों और फर्मों के जरिए पैसे को इधर-उधर करने से जुड़ा था। जांच में करीब 76 संदिग्ध फर्मों की भी पहचान किए जाने की जानकारी सामने आई है। �
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पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन फर्मों और बैंक खातों का वास्तविक संचालन कौन कर रहा था तथा उनके बीच हुए वित्तीय लेन-देन का आपस में क्या संबंध था।
₹5,600 करोड़ का आंकड़ा वास्तव में क्या बताता है?
यह इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है।
पुलिस के मुताबिक करीब ₹5,600 करोड़ का आंकड़ा अभी तक सामने आए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन (transactions) से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि पुलिस ने ₹5,600 करोड़ की वास्तविक साइबर ठगी की रकम साबित कर दी है।
PTI की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने बताया कि इन आंकड़ों का अभी सत्यापन किया जा रहा है। जांच में करीब 76 बैंक खातों और संबंधित संस्थाओं का विश्लेषण किया गया है। �
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इसलिए इस खबर में “₹5,600 करोड़ की ठगी साबित” कहने के बजाय “₹5,600 करोड़ के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच” कहना अधिक तथ्यात्मक है।
घटना कैसे सामने आई?
पुलिस की जांच में अलग-अलग बैंक खातों और साइबर अपराध की शिकायतों के बीच संबंध सामने आने के बाद नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों से जुड़े बैंक खातों को देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज साइबर अपराध शिकायतों से जोड़ा गया है। शिकायतों और बैंकिंग रिकॉर्ड के मिलान के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। �
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मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शाहवेज वारिस और सलमान के नाम सामने आए हैं। PTI के अनुसार वारिस को हैदराबाद में पकड़ा गया और बाद में ट्रांजिट रिमांड के जरिए कानपुर लाया गया। इसके बाद सलमान की गिरफ्तारी की गई। �
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पुलिस ने क्या बताया?
पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आए नेटवर्क के बैंक खातों से देश के कई राज्यों की साइबर अपराध शिकायतों का संबंध मिला है।
PTI के मुताबिक, वारिस से जुड़े 11 खातों में करीब ₹170 करोड़ के लेन-देन की जानकारी और सलमान से जुड़े दो खातों में करीब ₹16 करोड़ के लेन-देन का विवरण जांच में सामने आया है। इन आंकड़ों और शिकायतों का पुलिस द्वारा मिलान किया जा रहा है। �
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जांच में ऑनलाइन गेमिंग, निवेश, क्रिकेट सट्टेबाजी और कथित हवाला लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। �
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72 बैंक खातों और 76 फर्मों की जांच
जांच एजेंसियों के सामने करीब 72 संदिग्ध बैंक खातों का मामला आया है। इसके अलावा लगभग 76 संदिग्ध फर्मों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन फर्मों के पंजीकरण, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन के पीछे वास्तविक लोग कौन थे। कुछ फर्मों के पते फर्जी या सत्यापित नहीं होने की बात भी जांच में सामने आई है। �
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आरोपियों से क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान करीब ₹65.26 लाख नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।
Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार बरामद सामान में दो आईपैड, तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन, दो एटीएम कार्ड तथा बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज और लेन-देन की रसीदें शामिल हैं। �
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मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
मोबाइल चैट और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच
पुलिस के अनुसार आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से WhatsApp चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सामग्री मिली है। इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच के जरिए नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और कथित वित्तीय लेन-देन की कड़ियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। �
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यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि साइबर अपराध में बैंक खाते, मोबाइल नंबर, डिजिटल वॉलेट, फर्जी कंपनियां और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अक्सर एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं।
आरोपी अभी दोषी साबित नहीं हुए हैं
इस मामले में गिरफ्तार दोनों व्यक्ति फिलहाल आरोपी हैं। किसी न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किए जाने तक उन्हें अपराधी या दोषी कहना कानूनी रूप से उचित नहीं होगा।
पुलिस उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और कथित वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
पीड़ित पक्ष के बारे में क्या जानकारी है?
उपलब्ध रिपोर्टों में देश के अलग-अलग हिस्सों से साइबर अपराध की शिकायतों का इस नेटवर्क से संबंध मिलने की बात कही गई है। हालांकि प्रत्येक शिकायत में वास्तविक नुकसान की राशि और पीड़ितों की पूरी संख्या का अंतिम सत्यापन अभी जांच का हिस्सा है। �
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इसलिए इस चरण पर किसी एक निश्चित कुल पीड़ित संख्या या कुल वास्तविक ठगी की रकम का दावा करना उचित नहीं होगा।
अब तक की पुलिस कार्रवाई
पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से नकदी और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं।
इसके साथ ही संदिग्ध बैंक खातों, फर्मों और डिजिटल लेन-देन की जांच जारी है। पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का भी पता लगाने का प्रयास कर रही है। �
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आगे क्या होगा?
अब जांच का मुख्य फोकस ₹5,600 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन की वास्तविक प्रकृति पता लगाने पर है।
पुलिस को यह निर्धारित करना होगा कि इस रकम में से कितना हिस्सा कथित साइबर अपराध से जुड़ा था, कितनी रकम केवल खातों के बीच ट्रांसफर हुई और किन लोगों या संस्थाओं ने इन खातों एवं फर्मों को संचालित किया।
जांच में सामने आने वाले डिजिटल साक्ष्य और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। �
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