Category: Uncategorized

  • एक पत्नी जो खुद विधवा होना चाहती थी

    श्रीगंगानगर “मदर” केस

    एक कहानी जो हत्या से शुरू नहीं होती… सवाल से शुरू होती है


    शहर जो चुप रहना जानता है

    राजस्थान का श्रीगंगानगर।
    सीमावर्ती शहर।
    यहाँ आवाज़ें कम होती हैं, फाइलें ज़्यादा बोलती हैं।

    लेकिन हर शहर की तरह, यहाँ भी एक कहानी थी
    जो अचानक ब्रेकिंग न्यूज़ बन गई।

    एक महिला की मौत।
    नाम बताया गया — “मदर”

    और यहीं से कहानी शुरू नहीं होती…
    यहीं से कहानी उलझती है।


    मदर — नाम, पहचान या भूमिका?

    पहला सवाल, और सबसे बुनियादी सवाल:
    मदर कौन थी?

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,
    मदर का असली नाम — (जैसा पुलिस रिकॉर्ड में बताया गया)
    एक उम्र, एक पता, एक परिवार।

    लेकिन स्थानीय लोग उसे नाम से नहीं जानते थे।
    वो उसे “मदर” कहते थे।

    क्यों?

    • क्या वो धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी थी?
    • क्या वो आध्यात्मिक पहचान रखती थी?
    • या यह नाम किसी सामाजिक रोल से जुड़ा था?

    क्यों एक आम महिला का नाम,
    उसकी मौत के बाद उसकी पहचान बन गया?


    घर, जहाँ सब कुछ सामान्य लग रहा था

    जिस घर में मदर रहती थी वही घर अब क्राइम सीन था।

    पुलिस रिकॉर्ड कहता है:

    • घर में किसी ज़बरदस्ती के साफ़ निशान नहीं
    • दरवाज़ा अंदर से बंद होने की बात
    • कुछ सामान अस्त-व्यस्त

    लेकिन सवाल ये नहीं है कि क्या मिला
    सवाल ये है कि —
    क्या-क्या नहीं मिला?

    • CCTV फुटेज क्यों अधूरी है?
    • पड़ोसियों के बयान समय के साथ क्यों बदलते हैं?
    • और सबसे अहम
      घटना के समय घर में कौन-कौन था?

    अध्याय 3: वो रात — जब सब कुछ बदल गया

    रात का समय
    फोन कॉल्स
    कुछ मैसेज

    कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स बताते हैं कि
    मदर की मौत से पहले,
    कुछ नंबर एक्टिव थे।

    पुलिस के मुताबिक:

    • एक करीबी व्यक्ति
    • एक पारिवारिक संपर्क
    • और एक ऐसा नाम, जो बाद में शक के दायरे में आया

    लेकिन सवाल ये है:
    क्या कॉल करना अपराध है?
    या कॉल के पीछे की नीयत?


    शक — और पहली कहानी

    हर केस में एक नाम जल्दी उभरता है।
    यहाँ भी उभरा।

    मीडिया ने कहा — “मुख्य आरोपी”
    पुलिस ने कहा — “संदेह के आधार पर पूछताछ” यहीं फर्क पैदा होता है।

    क्या मीडिया और जांच एजेंसी एक ही भाषा बोल रही थीं?

    • बयान लीक कैसे हुए?
    • गिरफ्तारी से पहले ट्रायल क्यों शुरू हो गया?
    • और कुछ नामों पर चुप्पी क्यों रही?

    परिवार — जो जवाब चाहता है

    मदर का परिवार।
    एक तरफ शोक।
    दूसरी तरफ सवाल।

    परिवार का कहना:

    हमें पूरी सच्चाई चाहिए,
    चाहे वो किसी के भी खिलाफ जाए।”

    लेकिन परिवार से भी सवाल पूछे जाते हैं:

    • रिश्तों में तनाव था या नहीं?
    • संपत्ति या पैसे का कोई विवाद?
    • पुरानी शिकायतें?

    क्या हर सवाल इंसाफ के लिए होता है,
    या कभी-कभी कहानी मोड़ने के लिए?


    पुलिस जांच — तेज़ या तयशुदा?

    पुलिस कहती है:

    जांच वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है।”

    फॉरेंसिक टीम आई।
    रिपोर्ट बनी।
    लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं।

    क्यों?

    • क्या रिपोर्ट पूरी नहीं थी?
    • या रिपोर्ट असहज सवाल खड़े कर रही थी?

    जब जांच गोपनीय होती है,
    तो अफ़वाहें सार्वजनिक हो जाती हैं।


    खबर या फैसला?

    टीवी डिबेट।
    यूट्यूब थंबनेल।
    सोशल मीडिया रील्स।

    हर जगह एक ही लाइन:

    “सच सामने आ गया है।”लेकिन अदालत ने अभी कुछ नहीं कहा।

    तो सवाल उठता है:
    क्या TRP, FIR से तेज़ हो गई है?


    नाम, जिन पर बात कम हुई

    हर केस में कुछ नाम ऐसे होते हैं —
    जो फाइल में होते हैं,
    लेकिन स्क्रीन पर नहीं।

    • कुछ गवाह
    • कुछ परिचित
    • कुछ रिश्ते

    क्या उन सबकी बराबर जांच हुई?
    या कहानी को आसान बनाने के लिए,
    कुछ दरवाज़े बंद कर दिए गए?


    चुप्पी — सबसे बड़ा सबूत

    अब मदर बोल नहीं सकती।
    उसकी कहानी, दूसरे सुना रहे हैं।

    लेकिन सवाल ये है:
    क्या हम उसकी आवाज़ सुन रहे हैं,
    या अपनी सुविधा की कहानी?


    कानून की धीमी चाल

    कोर्ट।
    तारीख़।
    और फिर तारीख़।

    जनता पूछती है:

    इतनी जल्दी फैसला क्यों नहीं?”

    लेकिन कानून जवाब देता है:

    क्योंकि अधूरा फैसला,
    सबसे बड़ा अन्याय होता है।”


    ये केस क्यों ज़रूरी है?

    क्योंकि ये सिर्फ़ मदर की कहानी नहीं।
    ये कहानी है:

    • जांच प्रक्रिया की
    • मीडिया की भूमिका की
    • और हमारी जल्दबाज़ी की

    सवाल ये नहीं है कि
    किसने मारा?

    सवाल ये है:

    • क्या हमने सब सुना?
    • क्या हमने सब देखा?
    • या फिर,
      हमने वही माना जो हमें दिखाया गया?

    क्योंकि सच अक्सर शोर नहीं करता।
    वो चुपचाप फाइलों में बैठा रहता है…
    किसी एक सही सवाल का इंतज़ार करता हुआ।


  • “परफेक्ट मर्डर का वहम | एक फॉरेंसिक स्टूडेंट और सांस की गवाही

    अगर कोई इंसान फॉरेंसिक साइंस पढ़ रहा हो…
    अगर उसे पता हो कि सबूत कैसे मिटते हैं…
    अगर उसे मालूम हो कि पुलिस कहाँ चूक करती है…

    तो क्या वो परफेक्ट मर्डर कर सकता है?”

    और अगर वो भी फेल हो जाए…
    तो वजह क्या होगी?”

    आज की कहानी…
    एक ऐसी चूक की है,
    जो उंगलियों से नहीं…
    सांस से हुई।


    तारीख थी 17 अक्टूबर 2023
    जगह — सेक्टर-62, नोएडा
    समय — रात के लगभग 11 बजकर 42 मिनट

    तीसरी मंज़िल।
    कमरा नंबर 302
    एक किराए का मकान।

    इस कमरे में कोई चीख नहीं सुनी गई।
    कोई संघर्ष नहीं हुआ।
    और अगली सुबह…
    एक लाश मिली।”

    पुलिस ने पहली नज़र में कहा—
    Natural death.


    • उम्र: 24 साल
    • पेशा: प्राइवेट ट्यूटर
    • कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं
    • किसी से खुली दुश्मनी नहीं

    मौत शांत थी।
    बहुत ज़्यादा शांत।”

    और क्राइम की दुनिया में…
    शांत मौत हमेशा सवाल बन जाती है

    अब कहानी में एंट्री होती है…
    एक फॉरेंसिक साइंस स्टूडेंट की।”

    • फाइनल ईयर
    • हाई IQ
    • इमोशनल डिस्कनेक्ट

    उसके दोस्त कहते थे—

    वो क्राइम स्टडी नहीं करता था,
    वो क्राइम को जीता था।”

    उसकी नोटबुक में एक लाइन बार-बार लिखी थी:

    P erfect crime is not about murder,
    it’s about absence.’


    उसका मानना था—
    अपराधी इसलिए पकड़ा जाता है
    क्योंकि वो डर जाता है।”

    वो डर नहीं चाहता था।
    वो चाहता था — कंट्रोल।

    • कंट्रोल समय पर
    • कंट्रोल माहौल पर
    • कंट्रोल जांच पर

    उसे लगता था…

    मैं वो गलती नहीं करूंगा
    जो बाकी करते हैं।”


    9:10 PM
    पीड़ित कमरे में अकेला।

    9:48 PM
    आख़िरी फोन कॉल।

    10:30 PM – 11:15 PM

    ये वो वक्त है
    जहाँ कहानी खामोश हो जाती है।”

    11:42 PM
    एक परछाईं बाहर निकलती है।
    सीसीटीवी कुछ नहीं पकड़ पाता।

    अगली सुबह 7:20 AM
    लाश मिलती है।


    पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट

    बॉडी पर कोई बाहरी चोट नहीं।
    मौत का तरीका साफ़ नहीं।
    लेकिन…”

    पोस्ट-मॉर्टम डॉक्टर लिखता है—

    Death is calm,
    which itself is unnatural.”

    यहीं से केस पलटता है।

    वो सबूत जिसकी उम्मीद नहीं थी

    फेफड़ों के सैंपल।
    माइक्रो-एनालिसिस।

    और फिर…
    एक रिपोर्ट।

    Trace chemical particles detected.”

    ये केमिकल
    आम हवा में नहीं मिलता।

    सिर्फ़ एक जगह।
    👉 फॉरेंसिक लैब – प्रैक्टिकल सेक्शन


    सवाल जो सब बदल देते हैं

    पीड़ित कभी लैब गया ही नहीं।
    तो ये केमिकल आया कैसे?”

    जवाब था—
    ट्रांसफर।

    और ट्रांसफर हुआ…
    सांस के ज़रिये।


    सांस की गवाही

    मरते वक्त पीड़ित ने आख़िरी सांस ली।और उसी सांस के साथ वो माइक्रो-पार्टिकल्स उसके फेफड़ों में चले गए।

    जिस पर किसी का कंट्रोल नहीं होता—
    वो है सांस।

    अब सवाल पूछा जाता है—

    “कौन हाल के दिनों में
    उस केमिकल के संपर्क में था?”

    लिस्ट छोटी थी।
    बहुत छोटी।

    और उसी में था—
    वो फॉरेंसिक स्टूडेंट।


    जब उससे पूछा गया—

    17 अक्टूबर की रात आप कहाँ थे?”

    उसका जवाब
    बहुत परफेक्ट था।

    इतना परफेक्ट
    कि इंसानी नहीं लग रहा था।

    और यही सबसे बड़ी गलती होती है—
    ज़रूरत से ज़्यादा परफेक्शन।

    आप फिंगरप्रिंट मिटा सकते हैं।
    आप कैमरों से बच सकते हैं।
    आप कहानी बना सकते हैं।”

    लेकिन आप अपनी सांस को कहीं छोड़ आने से
    नहीं रोक सकते।”


    ये कहानी एक मर्डर की नहीं…ये कहानी एक वहम की है।”

    परफेक्ट मर्डर का वहम

    क्योंकि
    अपराध चाहे जितना पढ़ा-लिखा हो…
    सांस लेकर ही बाहर आता है

  • कोलकाता डॉ. रेप और मर्डर केस


    यह घटना दिनांक 9 अगस्त 2024 की सुबह कोलकाता स्थित RG Kar Medical College and Hospital में एक भयावह एवं दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जिसमें एक 31 वर्षीय महिला डॉक्टर से रेप और मर्डर किया गया।
    यह सरकारी अस्पताल है जहाँ घरेलू, सीनियर और जूनियर डॉक्टरों की तैनाती होती है, और यह पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य प्रणाली का एक प्रमुख केंद्र है।

    रिपोर्टों के मुताबिक, डॉक्टर ने लगभग 36-घंटे की लंबी ड्यूटी पूरी की थी और उसके बाद वह आराम करने कमरे में अकेली थी। सुबह करीब 7:30 बजे उसे सेमीनार रूम में मृत स्थिति में पाई गई ।


    कौन थी वो लेडी डॉ

    पीड़िता एक trainee doctor थी। वह अस्पताल के सीनियर और जूनियर डॉक्टरों के बीच एक मेहनती, समर्पित चिकित्सक के रूप में ज्ञात थी और देर रात तक पढ़ाई या दस्तावेजों पर काम कर रही थी। उसके सहकर्मियों ने बताया कि उसने रात को उनके साथ खाना भी साझा किया था और फिर अकेले रूम में पढ़ाई या विश्राम के लिए रही थी।


    प्रारंभिक जांच और गिरफ्तारी

    मुख्य आरोपी — Sanjay/Sanjoy Roy

    पुलिस ने तुरंत सिविक वॉलेंटियर (civic volunteer) Sanjay Roy (कुछ रिपोर्टों में Sanjoy Ray/Roy) को मुख्य संदिग्ध के रूप में चिन्हित किया। वह अस्पताल परिसर में स्वतंत्र रूप से घूमता था और उसे वहां की कई विभागों में जाने की अनुमति थी।
    CCTV फुटेज से पता चला कि उसने उस कमरे में प्रवेश किया था जहाँ पीड़िता पाई गई थी, और कुछ समय बाद बाहर निकला था। इस आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया।

    पुलिस ने संदिग्ध के चलते-फिरते कपड़ों पर खून के धब्बे पाए। बाद में DNA मिलान से भी उसका लिंक मजबूत हुआ।


    पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट — भयावह विवरण

    पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट ने इस केस की गंभीरता को और स्पष्ट किया:

    • गला घोंटने के कारण थायरॉयड कार्टिलेज टूटना
    • पीड़िता के मुंह, आँखों, गुप्तांग सहित शरीर के अनेक भागों पर घाव
    • शरीर में खून और चोटों के निशान, जो संघर्ष और अत्यधिक हिंसा के संकेत देते हैं
    • लिवर और फेफड़ों में रक्तस्राव और जख्मों के मेटाफिज़िकल संकेत।
      ये सब निष्कर्ष बताते हैं कि हत्या क़त्ल की योजना और क्रूरता के साथ की गई थी, न कि आत्महत्या।

    .घटना के तुरंत बाद का क्रम

    घटना स्थल और कैसे पाया गया शव

    पुलिस के अनुसार डॉक्टर रात करीब 3:00 से 5:00 बजे के बीच कमरे में अकेली थी। आरोपी उसने वहां प्रवेश किया और एक भीषण यौन हमला करने के बाद हत्या कर दी। शरीर की स्थिति और चोटों से पता चलता है कि पीड़िता ने भागने और चिल्लाने की पूरी कोशिश की, पर वह सफल नहीं हो पाई।

    इसके बाद आरोपी बिना देखकर भागा, जैसे कि उसने कोई साक्ष्य मिटाने की कोशिश की हो, और सीधा अपने रोज़ के कामों में लग गया।


    स्थानीय पुलिस की प्रारंभ कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान

    स्थानीय पुलिस ने तुरंत Special Investigation Team (SIT) गठित की। पर कुछ आरोप लगे कि पुलिस ने गवाहों के बयान लेने में देरी, और प्रारम्भिक साक्ष्यों को सुरक्षित करने में लापरवाही की। इसे लेकर बाद में सतर्कता और डेटा संग्रहण पर कटुता हुई।

    सीबीआई हस्तांतरण

    स्थानीय जांच पर सवाल उठे और कोलकाता उच्च न्यायालय के निर्देश पर यह मामला सीबीआई (Central Bureau of Investigation) को सौंप दिया गया ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो सके।

    सीबीआई ने मामले में कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले, उनमें शामिल थी आरोपी के जींस और जूतों पर पीड़िता का खून, जिससे हत्या की पुष्टि हुई।


    डॉक्टरों और जनता का विरोध

    यह घटना देशभर में विशाल विरोध प्रदर्शन का कारण बनी। मेडिकल स्टाफ, खासकर न्यूनतम वेतन प्राप्त डॉक्टर, ने अपनी सुरक्षा के लिए अस्पतालों के बाहर प्रदर्शन किए। उन्होंने सुरक्षित कार्यस्थल, 24×7 सुरक्षा, और उन दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

    West Bengal सरकार के खिलाफ नाराज़गी:
    कई डॉक्टरों ने पुलिस कमिश्नर से इस्तीफे की मांग की और उनके कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

    IMA और मेडिकल संघ:
    भारतीय चिकित्सा संघ सहित अन्य संगठनों ने इस घटना को महिला सुरक्षा प्रणाली में गंभीर विफलता के रूप में बताया।


    न्यायिक प्रक्रिया और सजा

    कोलकाता की सेल्डा कोर्ट में ट्रायल के बाद Sanjay Roy को 20 जनवरी 2025 को जीवन-पर्यंत कारावास की सजा सुनाई गई। जज ने श्रेणी के तहत मौत की सजा नहीं दी, पर यह सजा ही दी गई कि दोषी को जीवन-पर्यंत जेल में रहना है।

    • आरोपी ने अपनी बेगुनाही की बात कही और दावा किया कि वह फंसाया गया है, पर अदालत ने उसे दोषी पाया।
    • सजा सुनाए जाने के बाद भी पीड़िता के परिवार ने कहा कि पूरी न्याय नहीं हुआ, और वे अपीलीय प्रक्रिया का सहारा लेंगे।


    सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव

    यह घटना भारत में महिलाओं की सुरक्षा पर एक पुनः राष्ट्रीय बहस छिड़ गई: क्या भारत में महिला अब भी सुरक्षित है

    महिलाओं की सुरक्षा और कानून की प्रभावशीलता

    कई विशेषज्ञों और वकीलों ने कहा कि भारत में रेप-मर्डर जैसे मामलों के प्रति न्यायिक सिस्टम और पुलिस संरचना अब भी कमजोर है, और इसमें बहुत सारे लूप होल है जिसकी वजह से अपराधी कई बार बच कर आसानी से निकल जाते है

    सीबीआई की आवश्यकता और लोक प्रशासन में पारदर्शिता

    स्थानीय जांच की कमी के कारण सीबीआई को मामला सौंपा गया, जिससे कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या राज्य-स्तरीय पुलिस प्रक्रिया में पक्षपात या अन्य बाधाएँ थीं।


    निष्कर्ष

    यह केस केवल एक अपराध की कहानी नहीं रहा — बल्कि यह भारत में महिलाओं की सुरक्षा, न्याय के लिए लड़ाई, सरकारी जवाबदेही और सामाजिक चेतना का प्रतीक बन गया। एक डॉक्टर, जो लोगों की जान बचाती थी, खुद एक भयावह हिंसा का शिकार बनी और न्याय की माँग दुनिया भर में गूँजी।

  • लखनऊ के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में घुसकर दुकानदार को गोली मारी, दो बदमाश वारदात अंजाम देकर फरार

    उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में बेखौफ बदमाशों ने एक शॉपिंग कॉप्लेक्स में दुकानदार को गोली मार दी और मौके से फरार हो गए

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में दो अज्ञात व्यक्तियों ने एक दुकानदार पर गोली चला दी, जिससे वह घायल हो गया। पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। दक्षिण क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) निपुण अग्रवाल ने बताया, ‘यह घटना शुक्रवार की रात करीब 10:15 बजे अंसल सुशांत गोल्फ सिटी के शॉपिंग स्क्वायर-2 में हुई, जिसकी सूचना नियंत्रण कक्ष के जरिए मिली।’ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया

    उन्होंने बताया कि घायल की पहचान अवधेश कुमार पाठक (60) के रूप में हुई है, जो संत कबीर नगर जिले के निवासी हैं। वह फिलहाल लखनऊ के गोसाईगंज इलाके में रहते हैं और उनकी दुकान शॉपिंग स्क्वायर-1 में है। पुलिस ने बताया कि पाठक अपनी दुकान का कुछ सामान अपनी निजी कार में रख रहे थे, तभी दो अज्ञात व्यक्तियों ने उन पर गोली चला दी, जो उनकी दाहिनी आंख के ऊपर लगी।

    लखनऊ मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया

    पुलिस के अनुसार उन्हें तुरंत मेदांता अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया जा रहा है। चिकित्सकों ने बताया कि उनकी हालत स्थिर है और वह खतरे से बाहर हैं। डीसीपी ने बताया कि पीड़ित की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी शिकायत दर्ज की गई है।

  • साध्वी प्रेम बाईसा की मौत या कत्ल मिस्ट्री

    Sadhvi Prem Baisa Death: राजस्थान की चर्चित 23 वर्षीय कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसको लेकर अब कई तरह के सवाल उठ रहे है

    मामला इस प्रकार है

    साध्वी प्रेम बाईसा अचानक से 28 तारीख साम को बीमार पड़ जाती है उन्हें फीवर आता है फीवर आने के बाद उनके आश्रम में ही एक नर्स थी जिसे बुलाया जाता है और उन्हें बुखार उतरने के लिए एक दवा दी जाती है और एक इंजेक्शन दिया जाता है इंजेक्शन देने के कुछ ही घंटे बाद उनकी मौत हो जाती है अब हर किसी को लगता है कि बुखार की वजह से उनकी मौत हुई है लेकिन मौत के चार घंटे बाद एक पोस्ट आता है और इससे ये ज्ञात होता है कि यह नॉर्मल मौत नहीं है

    राजस्थान पुलिस कर रही है हर एंगेल् से जांच

    जोधपुर के पाल रोड क्षेत्र से जुड़ी कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की बुधवार शाम संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के लगभग चार घंटे बाद उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक कथित सुसाइड पोस्ट सामने आने से मामला और भी रहस्यमय हो गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से जांच कर रही है। प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे है। राजस्थान के दिग्गज नेता और सांसद हनुमान बेनीवाल ने जांच की मांग उठाई है।

    साध्वी को उनके पिता वीरमनाथ और एक युवक कार से पाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होगा, फिलहाल हर एंगल से जांच जारी है।

  • अजित पवार विमान हादसा: परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, फूट-फूट कर रोईं सुप्रिया सुले और पत्नी सुनेत्रा;

    बारामती में हुए विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद पूरा इलाका शोक में डूब गया। परिवार से मिलने पहुंचीं सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार परिवार से मिलते ही फूट-फूट कर रोने लगीं। फिलहाल अब अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है। कल 11 बजे पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया जाएगा

    अजीत पवार और देवेंद्र फडवीज – फोटो इंडिया टुडे

    बारामती में मंगलवार सुबह हुए विमान हादसे ने महाराष्ट्र की राजनीति और पवार परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया। इस हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन की खबर फैलते ही माहौल गमगीन हो गया। परिवार से मिलने पहुंचीं एनसीपी-एससीपी सांसद सुप्रिया सुले और अजित पवार की पत्नी व राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार खुद को संभाल नहीं सकीं और फूट-फूट कर रो पड़ीं। बारामती में हर चेहरा शोक और सन्नाटे से भरा दिखा।

    हादसा कैसे हुआ?
    सुबह के 8 46 मिनट पर अजित पवार जिस चार्टर्ड विमान से बारामती आ रहे थे, वह लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अधिकारियों के अनुसार यह एक क्रैश लैंडिंग थी, जिसमें विमान को गंभीर क्षति पहुंची और अजित पवार का निधन हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत टीमें मौके पर पहुंचीं। इलाके को सील कर जांच शुरू कर दी गई, जबकि पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई।


    परिवार से मुलाकात में छलका दर्द
    हादसे के बाद सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार बारामती में पवार परिवार के सदस्यों से मिलने पहुंचीं। जैसे ही उन्होंने परिजनों को देखा, दोनों अपने आंसू नहीं रोक सकीं और फफक-फफक कर रो पड़ीं। घर के बाहर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। पूरे माहौल में सन्नाटा पसरा है

    फडणवीस ने सुनेत्रा पवार से की मुलाकात

    महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद शोक का माहौल है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उनकी पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार से मुलाकात की।

    बारामती में बढ़ाई गई सुरक्षा
    प्रशासन ने बताया कि विमान हादसे की विस्तृत जांच की जा रही है। तकनीकी कारणों और लैंडिंग से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। परिवार की सहमति के बाद अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की जाएगी। बारामती में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।

    अजित पवार के निधन ने बारामती को गहरे दुख में डाल दिया है। सड़कों पर सन्नाटा है और लोग एक-दूसरे से बस यही पूछते नजर आ रहे हैं कि यह हादसा आखिर कैसे हुआ। परिवार,समर्थक और राज्य तीनों इस दुखद क्षति को स्वीकार करने की कोशिश कर रहे हैं।

    अजित पवार प्लेन हादसे पर बोले प्रधान मंत्री मोदी जी

    मोदी जी ने कहा महाराष्ट्र और देश कई लिए दुख का विषय है अजित पवार भले ही हमारे बीच नहीं है पर उनकी यादें हमेशा हमारे साथ रहेगी अजित दादा ने महाराष्ट और देश में अपना बड़ा योगदान दिया है मैं अजित पवार के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हु

  • पड़ोसी के प्यार में पागल मा ने अपने ही मासूम बेटे को मार डाला

    घटना म प के ग्वालियर जिले की है जहां पर रंगरलियां मनाने के लिए मां ने बच्चे को ही मार डाला

    सपने में दिखने लगा मरा बेटा तो कबूली सच्चाई

    कहते हैं कि प्यार और जंग में सब कुछ जायज है लेकिन ऐसा भी क्या जायज होना कि एक कलयुगी मां अपने जिगर के टुकड़े को ही मार डाले. जी हां, दिल को दहला कर रख देने वाली यह खबर पढ़ कर आपके रोंगटे खड़े होने वाले हैं. बेटे को मारने के बाद ऐसी कहानी बनाई कि पुलिस से लेकर के परिवार सबके होश उड़ गए.
    रात के सपने में दिखने लगा था मरा हुआ बेटा…पड़ोसी के प्यार में पागल मां को कुबूलना पड़ा अपना पाप 3 साल के मासूम जतिन को नहीं पता था कि जिस मां ने उसे 9 महीने कोख में पाला है, वही उसे अपनी आशिकी की खातिर मौत के घाट उतार देगी. पुलिस कांस्टेबल की (ज्योति) पत्नी ने पड़ोसी से चल रही अपनी आशिकी पर पर्दा डालने के लिए अपने मासूम बेटे को ही छत से फेंक दिया. मृत बेटा जब सपने में आने लगा तब यह भयानक राज खुला…

    कोर्ट ने सुनाई उमर कैद

    23 जनवरी 2026 को ग्वालियर कोर्ट ने ज्योति राठौर (अपने बटे की कातिल ) मा को कोर्ट ने आ जीवन कारावास की सजा सुनाई है

  • बिहार के नवादा की भयंकर डरने वाली घटना है डॉ के हाथ पेर काटे और जला दिया

    नवादा जिले के रोह प्रखंड के कोशी गांव में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। गांव से महज 500 मीटर की दूरी पर एक खेत से ग्रामीण डॉक्टर अशोक मिस्त्री (45 वर्ष) का शव बरामद हुआ। अपराधियों ने इस हत्याकांड को बेहद खौफनाक अंजाम दिया—पहले डॉक्टर के शरीर को दो टुकड़ों (धड़ और पैर) में काट दिया गया और फिर साक्ष्य मिटाने या दहशत फैलाने के उद्देश्य से उन्हें जिंदा जला दिया गया। इस घटना से क्षेत्र में डर का माहौल है

    मृतक के परिजनों ने बताया कि अशोक मिस्त्री गुरुवार रात 7:00 बजे घर से निकले थे। रात 9:00 बजे जब पत्नी ने फोन किया, तो मोबाइल स्विच ऑफ मिला। रात भर घर नहीं लौटने पर परिजनों ने शुक्रवार सुबह थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसी बीच सूचना मिली कि खेत में एक जला हुआ शव पड़ा है। घटनास्थल पर पहुंचे परिजनों ने चेहरे के बचे हुए हिस्से से अशोक की पहचान की। 

    पैसे या या पुरानी रंजिश गुत्थी को सुलझने में लगी पुलिस

    मृतक के पिता राजेंद्र मिस्त्री ने बताया कि अशोक उनके सबसे बड़े बेटे थे और पूरे परिवार के इकलौते सहारा थे। गांव में चर्चा थी कि अशोक अपनी प्रैक्टिस से अच्छा पैसा कमाते थे, जिससे पिता को आशंका है कि हत्या के पीछे लूट या पैसों की कोई बड़ी रंजिश हो सकती है। हालांकि, पिता ने यह भी कहा कि अशोक इतने नेक थे कि वे गरीबों का मुफ्त इलाज करते थे, जिससे वे पूरे क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय थे। 

    डॉग स्कड और फ्रैंसिक टीम पहुंची घटना स्थल पर

    घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी हुलास कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुष्टि की कि शव दो टुकड़ों में जला हुआ पाया गया है। साक्ष्य जुटाने के लिए पटना से FSL (फॉरेंसिक) और डॉग स्क्वायड की टीम को बुलाया गया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और अपराधियों की पहचान के लिए तकनीकी जांच तेज कर दी है। 

    बदले की आग में जली जिंदगी

    डीएसपी हुलास कुमार के अनुसार जिस तरीके हत्या हुऐ है बदले की भावना से किया गया है ऐसा लग रहा है हालांकि परिवार को किसी भी व्यक्ति विशेष पर शक नहीं है पुलिस टावर डंप और मो की लोकेशन के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है

  • साइबर क्राइम क्या होता है

    साइबर क्राइम एक तरफ क्राइम होता है जिसमें आपके साथ जितने भी ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है सभी साइबर क्राइम में आते हैं इसमें ऑनलाइन गेमिंग क्रिप्टोकरंसी ओटपी लेकर फंडट ट्रांसफर यह सभी साइबर क्राइम में आते हैं

    एशिया का सबसे बड़ा क्राइम माफिया

    एशिया का सबसे बड़ा क्राइम माफिया क्राइम इन हब म्यांमार यहां मैं 100 200 500 जामताड़ा की बात नहीं कर रहा हूं आज का के पार्क को लोग पूरी तरीके से साइबर क्राइम का अड़ा मानते है

    वहां पर दो तरीकों के स्कैम होते है

    वहां पर दो तरीके से स्कैन होता है एक क्रिप्टो स्कैम चलते हैं और दूसरा बैटिंग स्कैम म्यांमार ही ऐसा देश नही है जिसके अंदर ऐसे स्कैम होते है इसके साथ लाओस कामोबोडिया दुबई जैसे देश भी है जहां पर बड़े पैमाने पर साइबर क्राइम होता है

    उनके मुख्य जाल होता है इंस्टाग्राम पर लुभावने नौकरी के पोस्ट डाले कर युवाओं को फसाते है उनको 30000 थाई का लालच दिया जाता है और सभी चीजें फ्री में देते है

    फिर इसके बाद शुरू होता है उनका स्कैम

    प्लेन से उतारने के बाद बोला जाता है कि आप गेट नो 03 पर खड़े राहों आपको गाड़ी लाने आएगी वो आगे लेक जाएगी

    एक लड़की नाम लेके खड़ी थी जो एक दम नहीं नई फॉर्च्यूनर गाड़ी लेकर आई थी सबसे पहले हमारा पासपोर्ट मांगा जाता है हमें रिसीव किया है तो उसका प्रूफ भेजना होता है आगे कंपनी में आपका पासपोर्ट दे दीजिए वह अपने पास रख लेते है वह भी जानते हैं कि बिना पासपोर्ट के हम देश नहीं छोड़ सकते फिर वह हमें एक होटल में लेकर गए रात को 3 से 4 बजे दूसरा ड्राइवर आता है होटल से लेकर दूसरे चेक पोस्ट तक दूसरी गाड़ी आती है फिर तीसरी गाड़ी वैसे गाड़ी चेंज होते रहती है ताकि आप चीजों को समझ ना पाए टोटल 12 से 13 घंटे में कई गाड़ियां बदली गई फिर आखिर में एक नदी तक लेकर आ गए वहां पर दो आर्मी वाले आ रहे थे वहां पर फटाफट एक छोटी नाव में बठाया चलाकी बाद पता चलाकी अब तरीके से म्यांमार ले जाया जा रहा है म्यांमार की सीमा में जाते ही सबसे पहले आपके डिवाइस के लिए जाते है ताकि आप अपने देश और एंबेसी से संपर्क न कर सके आपको एक अच्छी जगह रखा जाता है ताकि आप सहज रहे वहां पर दो तरीके से स्कैम चलता है बैटिंग स्कैम और क्रिप्टो स्कैम सिर्फ भारत की बात करें तो वेटिंग एप्स के अंदर लाखों लोग करोड़ों अरबो रुपए गवा देते हैं करना यह होता है कि आपको एक वेबसाइट दी जाती है com करके यह उस की रियल एस्टे की वेबसाइट है वहां पर कैसा रहता है आप पार्टिकुलर एरिया जैसे मुंबई का हु तो मुंबई बल डालूंगा तो वहां पर जितने घर है उनके एड्रेस आ जाएंगे zilo.com पे वैसे उस का एड्रेस आ जाएगा फिर ऐसे एड्रेस को कॉपी करके पेस्ट करोगे तो वह घर के कितने मालिक है सभी की डिटेल आ जाएगी फिर उसमें से आपको 800 लोगों का नंबर दिया जाएगा फिर उनमें से उसने से 50 से75 वर्ष बीच के लोगों को टारगेट किया जाएगा एक वेबसाइट है वहां पर फ्री में मैसेज आते है पहले बात तो आपको एक फीमेल बनकर बात करनी होती है क्योंकि आपका टारगेट मेल कस्टमर होता है उनमें से जो रिप्लाई आता है उनसे थोड़ी बाते होती है वह से छोटी छोटी बात में उनसे वॉट्सएप नो लिया जाता है आगे वो वॉट्सएप नो टीम लीडर को देना होता है उनके ऊपर के जो भी ऑफिसर्स होते हाय और इनके जो बॉस होते हाय ओ सभी चाइनीज़ होते हाय जो बंदे से चैट करते है समझ नहीं आता कि सामने लड़का है या लड़की

    पूरी दुनिया की क्रिप्टो मार्केट लगभग 3.2 ट्रिलियन की हाय लोग इसलिए इसमें पैसा इन्वेस्ट कभी किसी को अच्छा प्रॉफिट होता है कभी किसी को अच्छा लाश होता है क्रिप्टो स्कैम की बात के जाए तो सबसे पहले स्कैमर जब भी आपसे कनेक्ट होता है वह ऐसे मैटर आपको गाइडेंस देता है वह एक वेबसाइट वेबसाइट जो क्रिप्टो बेस्ड होती है उसके ऊपर आपको रीडायरेक्ट करता है और स्टार्टिंग के अंदर आपको एक अच्छा मुनाफा भी देता है आप उसे पैसे को विड्रोल भी कर सकते हो कुछ टाइम में जब आपका इन्वेस्टमेंट इसके अंदर बढ़ता चला जाता है तो यह लोग वेबसाइट को डाउन कर देते हैं आपका क्रिप्टो मनी चला जाता है अक्सर क्रिमिनल एक सैंपल वॉलेट में ट्रांसफर कर देता है इस प्रक्रिया को टेबलर बोलते है तबला फिल्म 100 वॉलेटस पैसा दूसरे डिफरेंट 100 वालेट में जाता है और बहुत सारी लेयर बनाई जाती है यहां एक ही टइम पर नहीं होता है अलग-अलग टाइम पर होता है सिंक्रोनाइज यह होता है इसमें कई सारे वॉलेट भी मक्स करदिए जाते है तो ऐसे आपक फ्यूज हो सकते है कि यह गेमिंग का पैसा है फिर इस पेज को आईडेंटिफाई करके अलग निकालआ जाता है और 6 या 7 लेयर में पैसा किसी ऐसे वॉलेट में डाला जाता है जहां से किसी एक्सचेंज में पैसा रियाल करेंसी में कन्वर्ट किया जा सके

  • चित्रकूट – व्यापारी के पुत्र अपहरण और हत्या

    हाल ही में चित्रकूट अपहरण और हत्या मामले में पुलिस ने अपने निष्कर्ष सामने रखे हैं। यह मामला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के बरगढ़ क्षेत्र में एक 13–14 वर्षीय लड़के, जो स्थानीय कपड़े के व्यापारी का पुत्र था, के अपहरण से जुड़ा था।

    अपहरण करने वाला था पुराना किराएदार

    अपहरण करता उनका एक पुराना किराएदार था उसे अगस्त में किराएदारी से हटाया था आपहरणकर्ताओं ने रिश्वत की मांग की, लेकिन बाद में लड़के की हत्या कर दी गई और उसका शव आरोपियों से जुड़े एक कमरे से बरामद हुआ। बाद में पुलिस कार्रवाई के दौरान एक मुठभेड़ हुई, जिसमें एक कालू नाम का आरोपी मारा गया और दूसरा घायल होकर गिरफ्तार किया गया। इसके बाद दूसरे आरोपी को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर प्रयागराज ले जाए गया

    क्षेत्र में तनाव की स्थिति

    घटना ने जनता में आक्रोश और विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया, स्थानीय लोग आक्रोशित होकर अभी नेशनल हाईवे जाम लगाए हुए हैं जिन्हें समझा बुझा कर जाम हटाने का प्रयास किया कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस काम में लगे हुए हैं स्थानीय लोगों ने कड़ी कार्रवाई और बेहतर कानून-व्यवस्था की मांग की