घटना का सीन और शुरुआती इंस्पेक्शन
10 नवंबर 2025 की शाम लगभग 6:52 बजे, जब दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन (Gate No. 1) के पास लोगों की भीड़ घर लौट रही थी, वहीँ एक सफेद Hyundai i20 कार में अचानक जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट इतना प्रचंड था कि आसपास गाड़ियाँ जल गईं, शीशे चूर-चूर हो गए और सड़क पर भगदड़ मची। स्थानीय दुकानदार, राहगीर और मेट्रो यात्री सब एक ही पल में डर की आग में झुलसते नज़र आए।
स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक टीम दौड़े, धमाके के कारण और ज़िम्मेदार लोगों की तलाश में जगह को चारों ओर से सील कर दिया गया। इसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मामले को अपने नियंत्रण में लिया और इसे आतंकी हमले के रूप में दर्ज किया।
यस तलाशी और जानकारी इकट्ठा करने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह सिर्फ़ एक गाड़ी का फट जाना नहीं था, बल्कि एक IED (Improvised Explosive Device) से किया गया योजनाबद्ध हमला था।

फोटो क्रेडिट बाय नीतीश राजपूत
आतंकी हमले की प्रकृति
NIA की प्रारंभिक साझा जानकारी में बताया गया कि विस्फोट कार में छिपाई गई बम सामग्री / विस्फोटक से किया गया था। अधिकारियों ने इस धमाके को “कार-बॉर्न आत्मघाती हमला (vehicle-borne suicide attack)” बताया। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह आतंकी साजिश थी ना कि कोई आकस्मिक दुर्घटना।
स्थानीय और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस घटना के बाद दिल्ली समेत पूरे देश में हाई अलर्ट जारी किया, खासतौर पर रेलवे स्टेशन, मेट्रो नेटवर्क, हवाई अड्डे और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी।
तीसरा भाग — मुख्य आरोपी और गिरफ्तारी
NIA की जांच ने धीरे-धीरे मामले की “नेटवर्क” तस्वीर सामने लानी शुरू कर दी, और अब तक आधिकारिक रूप से नाम और भूमिका निम्नलिखित लोगों के बारे में सामने आया है:
1) उमर उन नबी (Umar Un Nabi)
यह नाम NIA की आधिकारिक चार्जशीट और कोर्ट दस्तावेजों में सामने आया है। उसे धमाके की चाबी भूमिका में बताया गया — वह वही व्यक्ति था जिसके द्वारा विस्फोटक सामग्री से लदी कार चलाई गई।
• उमर उन नबी पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर के पलवामा जिल्ले का निवासी और फरीदाबाद में रह कर पढ़ाने वाला डॉक्टर (Assistant Professor) था।
• NIA के मुताबिक़ उसने कार को ड्राइव किया और विस्फोटक को ट्रिगर किया, जिससे यह हमला हुआ।
• जांच एजेंसी ने DNA और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उसकी पहचान की और ही आत्मघाती हमलावर (suicide bomber) के तौर पर गिरफ़्तारी के बजाय नामांकन किया।
यह महत्त्वपूर्ण है कि उमर उन नबी पर आरोपियों की सूची में नामांकन किया गया, लेकिन वह धमाके में भयंकर रूप से घायल हुआ और घटना के समय ही उसकी मौत हुई — इसलिए उसे अदालत में गिरफ़्तार नहीं किया गया लेकिन उसको मुख्य आरोपी माना गया।
2) आमिर राशिद अली (Amir Rashid Ali)
यह पहला नाम था जिसे NIA ने गिरफ्तार किया, और उसके बारे में अदालत में आधिकारिक बयान भी दर्ज किया गया।
• आमिर राशिद अली ने Hyundai i20 कार को खरीदने / उसे प्रबंधित करने में मदद की, जिस पर बाद में विस्फोट हुआ।
• NIA ने अदालत में यह बताया कि इस कार का रजिस्ट्रेशन उसके नाम पर था, और इसी कार का इस्तेमाल बम विस्फोट के लिए किया गया।
• दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे NIA केcustody में 10 दिनों के लिए भेजा।
यह वही व्यक्ति था, जिसके बारे में रिपोर्टर के सामने अदालत से निकलते समय संवाद हुआ और सवाल पूछा गया कि “आपने यह कैसे किया?” — लेकिन आमिर ने कोई जवाब नहीं दिया।
3) जसिर बिलाल वानी (Jasir Bilal Wani)
NIA के बयान के अनुसार, यह दूसरा नाम है जिसे उन्होंने सक्रिय सहयोगी (active co-conspirator) बताया।
• जसिर वानी को सिन्धारे तकनीकी सहायता देने और कुछ रणनीतिक समर्थन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
• एजेंसी के अनुसार वह ड्रोन संशोधन और धमाके-पूर्व कुछ तकनीकी सेवाएँ प्रदान कर रहा था।
• उसे जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया और NIA की हिरासत में रखा गया।
4) डॉ. मुज़म्मिल शेकील गनाई
NIA की चार्जशीट में एक अन्य व्यक्ति के तौर पर नाम आया है, जिन पर जांच के दौरान संदिग्ध कनेक्शन का संज्ञान लिया गया।
• वह पलवामा का एक डॉक्टर है, और एजेंसी ने उसकी भूमिका को नेटवर्क के वाइट-कालर मॉड्यूल से जोड़ने की कोशिश की।
• उसके साथ और तीन व्यक्तियों (डॉ. अदील अहमद रदर, डॉ. शहीना सईद और मौलवी इरफ़ान अहमद वेग) को हिरासत में लिया गया था, और अदालत ने उन्हें कुछ समय के लिए NIA कस्टडी में भेजा।
• बाद में अदालत में जांच आगे बढ़ने पर NIA ने उन्हें चार दिन की अतिरिक्त हिरासत भी दी।
इन सभी चार के नाम NIA अधिकारिक बयान/कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इनमें से कुछ पर चार्जशीट तैयार की जा रही है और कुछ की पूछताछ जारी है।
5) यासिर अहमद दर (Yasir Ahmad Dar)
सभी हिरासत की खबरों में यह नवां नाम है जिसे NIA ने आधिकारिक बयान में शामिल किया है।
• यासिर को NIA ने हिरासत में लिया क्योंकि जांच में पता चला कि वह Umar Un Nabi के साथ सीधे संपर्क में था, और विस्फोट के पीछे की साजिश में शामिल था।
• अदालत ने उसे NIA की हिरासत में भेज दिया ताकि आगे पूछताछ जारी रह सके।
हिरासत और NIA निगरानी
NIA की जांच में उल्लेख है कि अब तक लगभग 9 लोग गिरफ्तार किए गए हैं — जिनमें से कुछ को कोर्ट में पेश किया गया है और कुछ की पूछताछ जारी है। इन नामों को एजेंसी ने कथित तौर पर नेटवर्क के कनेक्ट में जोड़ा है और इनमें से कुछ लोग तकनीकी/लॉजिस्टिक सपोर्ट का भूमिका निभाने वाले बताए गए हैं।
यह महत्वपूर्ण है कि कुछ हिरासत में लिए गए लोग बाद में साक्ष्य की कमी के कारण ज़मानत पर रिहा किए भी गए — लेकिन ऊपर दिए नाम ऐसे हैं जिनके नाम सरकारी बयान/कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज हुए हैं। (रिलीज़ का विवरण भी खुल सकता है, पर वह अलग डॉक्यूमेंट में शामिल होंगे।)
कोर्ट और कानूनी प्रक्रिया
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट तथा NIA स्पेशल कोर्ट में केस को आगे बढ़ाने के लिए कई सुनवाइयां हुईं। मुख्य आरोपी आमिर राशिद अली, जसिर बिलाल, यासिर अहमद दर और डॉक्टर/मौलवी को कोर्ट में पेश किया गया और हिरासत की अवधि बढ़ाई गई। NIA ने इन सबकी अतिरिक्त हिरासत और पूछताछ की मांग की ताकि नेटवर्क, फंडिंग, आदेश केंद्र और योजना की गहराई से जांच हो सके।
टीम और एजेंसी का स्टैंड
सरकार ने इस घटना की निंदा की और इसे एक आतंकी हमला करार दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय, NIA, दिल्ली पुलिस तथा अन्य एजेंसियाँ मिलकर जांच में जुटीं, और यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ माना गया।
सूची — आधिकारिक तौर पर सामने आए नाम
- उमर उन नबी — आत्मघाती हमलावर / कार चालक (मृतु अवस्था में आरोपी)
- आमिर राशिद अली — कार खरीद और सपोर्ट
- जसिर बिलाल वानी — तकनीकी समर्थन और सहयोग
- डॉ. मुज़म्मिल शेकील गनाई — संदिग्ध सहयोगी
- डॉ. अदील अहमद रदर — संदिग्ध सहयोगी
- डॉ. शहीना सईद — संदिग्ध सहयोगी
- मौलवी इरफ़ान अहमद वेग — संदिग्ध सहयोगी
- यासिर अहमद दर — कथित साजिश में शामिल
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